आप तो चाँद हैं, जिसे सब याद करते हैं… हमारी किस्मत तो तारों जैसी है – लोग हमारी अच्छाइयों को भूलकर केवल हमारी छोटी-सी गलती को क्यों याद रखते हैं? जीवन में कभी न कभी लगभग हर व्यक्ति के मन में यह प्रश्न अवश्य उठता है कि **आख़िर लोग हमारी एक छोटी-सी गलती को ही क्यों याद रखते हैं?** वर्षों तक किए गए हमारे अच्छे कार्य, हमारा प्रेम, हमारी सेवा, हमारा त्याग और हमारी निष्ठा जैसे एक पल में भुला दिए जाते हैं। लेकिन यदि कभी अनजाने में एक भूल हो जाए, तो वही बात लोगों की यादों में सबसे अधिक समय तक बनी रहती है। इसी सत्य को एक बहुत सुंदर सुविचार के माध्यम से समझाया गया है— **"आप तो चाँद हैं, जिसे सब याद करते हैं। हमारी किस्मत तो तारों जैसी है, याद तो दूर लोग अपनी ख्वाहिशों के लिए हमारे टूटने की फरियाद करते हैं।"** पहली नज़र में यह केवल एक भावनात्मक पंक्ति प्रतीत होती है, लेकिन यदि इसके भीतर छिपे संदेश को समझा जाए, तो यह मनुष्य के पूरे जीवन का आईना बन जाती है। संसार का स्वभाव ही ऐसा है कि वह अच्छाइयों की अपेक्षा कमियों पर अधिक ध्यान देता है। यदि कोई व्यक्ति सौ लोगों की सहायता करे...
नाम ही सच्चा सहारा है: कलियुग में मुक्ति का वास्तविक मार्ग मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि हम कौन हैं, कहाँ से आए हैं और इस जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है? संसार में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति सुख, शांति और संतोष की तलाश में रहता है। कोई धन में सुख खोजता है, कोई परिवार में, कोई प्रतिष्ठा में और कोई धार्मिक कर्मकांडों में। लेकिन फिर भी मनुष्य के भीतर एक खालीपन बना रहता है। यही खालीपन उसे बार-बार यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या जीवन का उद्देश्य केवल खाना, कमाना और एक दिन इस संसार से चले जाना ही है? संतों और महापुरुषों ने सदैव कहा है कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य परमात्मा को जानना और उससे मिलन करना है। इसी सत्य को बड़े सुंदर ढंग से समझाया गया है कि इस कलियुग में यदि कोई एक साधन है जो मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर सकता है, तो वह है नाम और शब्द की साधना। गुरु से मिलन: अनेक जन्मों की प्यास का अंत संत सहजोबाई कहती हैं कि जब सच्चे गुरु का मिलन होता है, तब अनेक जन्मों की अधूरी इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं। मन को वह शांति मिलती है जिसकी तलाश वह जन्मों से कर रहा था। गुरु केव...
“चलो अपने घर लौट चलें…” | एक आत्मा की सच्ची पुकार 🌌🙏 रात का समय था। शहर की चमकती रोशनियों के बीच हजारों लोग अपनी-अपनी जिंदगी में व्यस्त थे। कहीं पार्टियाँ चल रही थीं… कहीं लोग पैसों के पीछे भाग रहे थे… कहीं रिश्तों में झगड़े थे… तो कहीं कोई अकेले कमरे में बैठकर रो रहा था। उसी शहर के एक छोटे से फ्लैट में आरव नाम का युवक खिड़की के पास बैठा आसमान देख रहा था। उसके पास सब कुछ था: अच्छी नौकरी पैसा गाड़ी मोबाइल branded कपड़े social media पर followers लेकिन फिर भी उसके अंदर अजीब-सी खालीपन की भावना थी। उसे लगता था जैसे: “सब कुछ होते हुए भी… कुछ बहुत जरूरी चीज़ गायब है…” बाहर खुशी… अंदर बेचैनी आरव की जिंदगी बाहर से perfect दिखती थी। Instagram पर उसकी luxury photos थीं। लोग उसे successful कहते थे। लेकिन सच्चाई कुछ और थी। रात को उसे नींद नहीं आती थी। Stress, anxiety और डर हमेशा उसके अंदर रहता। उसे हर समय यह चिंता रहती: नौकरी चली गई तो? लोग respect देना बंद कर दें तो? पैसा कम हो गया तो? कोई और उससे आगे निकल गया तो? धीरे-धीरे वह अंदर से टूटने लगा। एक अनोखी मुलाकात एक रविवार वह अपने दोस्त के ...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें