संदेश

Sant Vani लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नाम रत्न धन पायो जी

चित्र
  नाम रत्न धन: राधा स्वामी भजनों में छिपा आत्मिक खजाना आध्यात्मिक शांति, गुरु-भक्ति और नाम-सुमिरन की महिमा पर आधारित एक विशेष लेख मनुष्य जीवन में धन, पद, प्रतिष्ठा और भौतिक सुखों की चाह कभी समाप्त नहीं होती। हर व्यक्ति अपने जीवन में किसी न किसी प्रकार की संपत्ति अर्जित करने में लगा रहता है। लेकिन संतों और महापुरुषों ने सदैव एक ऐसे धन की बात की है जो नष्ट नहीं होता, चोरी नहीं होता और मृत्यु के बाद भी साथ रहता है। यही है “नाम रत्न धन” । राधा स्वामी सत्संग की वाणी और भजनों में बार-बार इसी नाम-धन की महिमा का वर्णन मिलता है। प्रस्तुत भजनों में आत्मा की पुकार, गुरु की महिमा, शरणागति, प्रेम, विरह और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना दिखाई देती है। नाम रत्न धन क्या है? भजन की आरंभिक पंक्तियाँ कहती हैं— "नाम रत्न धन पायो जी मैंने नाम रत्न धन पायो" यहाँ नाम को एक अनमोल रत्न कहा गया है। संसार का धन समय के साथ समाप्त हो सकता है, लेकिन ईश्वर का नाम ऐसा खजाना है जो आत्मा को सदैव समृद्ध बनाता है। संतों के अनुसार: सांसारिक धन शरीर तक सीमित है। नाम-धन आत्मा के लिए है। भौतिक संपत्ति मृत्यु ...

क्या दुनिया में कभी स्थायी सुख मिल सकता है?

चित्र
 

मन को काबू करने का सबसे आसान आध्यात्मिक मार्ग

चित्र
  मन और आत्मा की जंग: ध्यान, नाम और भीतर की असली शांति आज की दुनिया में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जो अपने मन से परेशान न हो। कभी तनाव, कभी डर, कभी गुस्सा, कभी चिंता — मन हर समय इंसान को किसी न किसी दिशा में खींचता रहता है। बाहर से इंसान कितना भी सफल क्यों न दिखे, लेकिन अगर उसका मन अशांत है तो वह भीतर से टूटने लगता है। यही कारण है कि संतों और महापुरुषों ने हमेशा मन को समझने और उसे सही दिशा देने पर जोर दिया है। आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले हर व्यक्ति के सामने सबसे बड़ी चुनौती मन ही होता है। कभी यह हमें भक्ति से दूर ले जाता है, कभी ध्यान में बैठने नहीं देता, कभी आलस्य पैदा करता है और कभी हजारों विचारों में उलझा देता है। लेकिन संतमत की शिक्षा कहती है कि यही मन एक दिन हमारा सबसे बड़ा मित्र भी बन सकता है। सवाल यह है कि यह परिवर्तन कैसे होता है? संतों ने समझाया कि मन को जीतने का एक ही मार्ग है — नाम, सिमरन और ध्यान। जब मन भीतर के शब्द से जुड़ता है, तब उसका स्वभाव बदलने लगता है। यही आध्यात्मिक यात्रा का असली आरंभ है। मन क्यों भटकता है? मन का स्वभाव बाहर भागना है। वह हमेशा नई चीजें चाहता ...