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नाम रत्न धन पायो जी

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  नाम रत्न धन: राधा स्वामी भजनों में छिपा आत्मिक खजाना आध्यात्मिक शांति, गुरु-भक्ति और नाम-सुमिरन की महिमा पर आधारित एक विशेष लेख मनुष्य जीवन में धन, पद, प्रतिष्ठा और भौतिक सुखों की चाह कभी समाप्त नहीं होती। हर व्यक्ति अपने जीवन में किसी न किसी प्रकार की संपत्ति अर्जित करने में लगा रहता है। लेकिन संतों और महापुरुषों ने सदैव एक ऐसे धन की बात की है जो नष्ट नहीं होता, चोरी नहीं होता और मृत्यु के बाद भी साथ रहता है। यही है “नाम रत्न धन” । राधा स्वामी सत्संग की वाणी और भजनों में बार-बार इसी नाम-धन की महिमा का वर्णन मिलता है। प्रस्तुत भजनों में आत्मा की पुकार, गुरु की महिमा, शरणागति, प्रेम, विरह और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना दिखाई देती है। नाम रत्न धन क्या है? भजन की आरंभिक पंक्तियाँ कहती हैं— "नाम रत्न धन पायो जी मैंने नाम रत्न धन पायो" यहाँ नाम को एक अनमोल रत्न कहा गया है। संसार का धन समय के साथ समाप्त हो सकता है, लेकिन ईश्वर का नाम ऐसा खजाना है जो आत्मा को सदैव समृद्ध बनाता है। संतों के अनुसार: सांसारिक धन शरीर तक सीमित है। नाम-धन आत्मा के लिए है। भौतिक संपत्ति मृत्यु ...

🌹 जीवन में संतुलन, सिमरन और प्रेम का मार्ग: बाबा जी की अमूल्य शिक्षाएँ 🙏

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  जीवन में संतुलन, सिमरन और प्रेम की शक्ति: बाबा जी के प्रश्नोत्तर से मिलने वाली अमूल्य सीख आज के समय में हर व्यक्ति किसी न किसी संघर्ष से गुजर रहा है। कोई परिवार की जिम्मेदारियों से परेशान है, कोई करियर को लेकर चिंतित है, कोई आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ना चाहता है लेकिन मन का साथ नहीं मिलता। ऐसे में संतों की वाणी हमें जीवन को सही दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा देती है। हाल ही में हुए एक प्रश्नोत्तर कार्यक्रम में बाबा जी ने साधारण लगने वाले प्रश्नों के माध्यम से जीवन, कर्म, सिमरन, सेवा, परिवार और आध्यात्मिकता से जुड़े कई गहरे विषयों पर प्रकाश डाला। यह केवल प्रश्नों के उत्तर नहीं थे, बल्कि जीवन जीने की कला के सूत्र थे। आइए इन शिक्षाओं को विस्तार से समझते हैं। सबसे बड़ी पहचान – अच्छा शिष्य बनना अक्सर लोग आध्यात्मिक मार्ग में भी बाहरी भूमिकाओं को महत्व देने लगते हैं। कोई चाहता है कि वह गुरु का ड्राइवर बने, कोई सुरक्षा सेवा में रहे, कोई किसी विशेष जिम्मेदारी को प्राप्त करे। लेकिन बाबा जी ने बहुत सरल शब्दों में समझाया कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं है कि हम कौन-सी सेवा कर रहे हैं, बल्कि ...