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मन को जीतो, जीवन को जीतो – हज़ूर स्वामी जी महाराज की दिव्य वाणी

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  सोए हुए मन को जगाने का मार्ग: हज़ूर स्वामी जी महाराज की अमूल्य शिक्षा मनुष्य का जीवन बाहर से देखने में जितना सरल दिखाई देता है, भीतर से उतना ही जटिल है। हर व्यक्ति सुख चाहता है, शांति चाहता है, प्रेम चाहता है और अंततः उस परम सत्ता तक पहुँचना चाहता है जिसने उसे इस संसार में भेजा है। लेकिन फिर भी अधिकांश लोग बेचैन, दुखी और असंतुष्ट दिखाई देते हैं। इसका कारण क्या है? हज़ूर स्वामी जी महाराज अपनी वाणी में बताते हैं कि परमात्मा हमसे दूर नहीं है। वह हमारे ही भीतर विद्यमान है। फिर भी हम उसे अनुभव नहीं कर पाते, क्योंकि हमारे और परमात्मा के बीच एक बहुत बड़ा पर्दा खड़ा है — मन का पर्दा। मन: हमारा सबसे बड़ा मित्र या सबसे बड़ा शत्रु दुनिया में अनेक वीर योद्धा हुए हैं। किसी ने अपने देश के लिए युद्ध लड़ा, किसी ने धर्म की रक्षा के लिए प्राण दिए। लेकिन संतों की दृष्टि में सबसे बड़ा योद्धा वह है जिसने अपने मन को जीत लिया। मन बाहर का दुश्मन नहीं है जिसे तलवार या बंदूक से हराया जा सके। यह तो हमारे भीतर बैठा हुआ ऐसा शत्रु है जो कभी मित्र बनकर धोखा देता है और कभी भय दिखाकर गलत रास्ते पर ले जाता है। कभ...

चलो अपने घर लौट चलें…” | एक आत्मा की सच्ची पुकार 🌌🙏

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  “चलो अपने घर लौट चलें…” | एक आत्मा की सच्ची पुकार 🌌🙏 रात का समय था। शहर की चमकती रोशनियों के बीच हजारों लोग अपनी-अपनी जिंदगी में व्यस्त थे। कहीं पार्टियाँ चल रही थीं… कहीं लोग पैसों के पीछे भाग रहे थे… कहीं रिश्तों में झगड़े थे… तो कहीं कोई अकेले कमरे में बैठकर रो रहा था। उसी शहर के एक छोटे से फ्लैट में आरव नाम का युवक खिड़की के पास बैठा आसमान देख रहा था। उसके पास सब कुछ था: अच्छी नौकरी पैसा गाड़ी मोबाइल branded कपड़े social media पर followers लेकिन फिर भी उसके अंदर अजीब-सी खालीपन की भावना थी। उसे लगता था जैसे: “सब कुछ होते हुए भी… कुछ बहुत जरूरी चीज़ गायब है…” बाहर खुशी… अंदर बेचैनी आरव की जिंदगी बाहर से perfect दिखती थी। Instagram पर उसकी luxury photos थीं। लोग उसे successful कहते थे। लेकिन सच्चाई कुछ और थी। रात को उसे नींद नहीं आती थी। Stress, anxiety और डर हमेशा उसके अंदर रहता। उसे हर समय यह चिंता रहती: नौकरी चली गई तो? लोग respect देना बंद कर दें तो? पैसा कम हो गया तो? कोई और उससे आगे निकल गया तो? धीरे-धीरे वह अंदर से टूटने लगा। एक अनोखी मुलाकात एक रविवार वह अपने दोस्त के ...