कलियुग में मुक्ति का एकमात्र मार्ग: नाम और शब्द की महिमा
नाम ही सच्चा सहारा है: कलियुग में मुक्ति का वास्तविक मार्ग मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि हम कौन हैं, कहाँ से आए हैं और इस जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है? संसार में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति सुख, शांति और संतोष की तलाश में रहता है। कोई धन में सुख खोजता है, कोई परिवार में, कोई प्रतिष्ठा में और कोई धार्मिक कर्मकांडों में। लेकिन फिर भी मनुष्य के भीतर एक खालीपन बना रहता है। यही खालीपन उसे बार-बार यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या जीवन का उद्देश्य केवल खाना, कमाना और एक दिन इस संसार से चले जाना ही है? संतों और महापुरुषों ने सदैव कहा है कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य परमात्मा को जानना और उससे मिलन करना है। इसी सत्य को बड़े सुंदर ढंग से समझाया गया है कि इस कलियुग में यदि कोई एक साधन है जो मनुष्य को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त कर सकता है, तो वह है नाम और शब्द की साधना। गुरु से मिलन: अनेक जन्मों की प्यास का अंत संत सहजोबाई कहती हैं कि जब सच्चे गुरु का मिलन होता है, तब अनेक जन्मों की अधूरी इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं। मन को वह शांति मिलती है जिसकी तलाश वह जन्मों से कर रहा था। गुरु केव...